Thursday, December 22, 2022

Rajasthanii word for REET exam 2023/ राजस्थानी शब्दावली फॉर रीट परीक्षा

खम्बा घणी  सबको ,

                        आज की पोस्ट में राजस्थानी भाषा में बोले जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण शब्दो  के बारे में जानेंगे। कुछ शब्द तो ऐसे है जिनका हम मतलब तो समझते है परन्तु उनको हिंदी में लिखे केसे।  और उनका काम क्या है। 

 



चलो शुरू करते है,


खेत में काम में आने वाले उपकरण 


  1. जेळी - लकड़ी का बना हुआ सिंगदार उपकरण जो छाड़ियो  के गट्ठर को उठाने या इकट्ठा  करने के काम आता है , इसमे सींग दो , चार, छ, और बारह  सींगो तक हो सकते है. जिन्हे दोसिंगी, चौसिंगी छसिंगी और बारहसिंगी जेळी  के नाम से  पुकारते है.
  2. फावड़ा - मिट्टी को इकठा करने वाला उपकरण। इसके आलवा  इसे मिट्टी  खोदने , छोटे छोटे कांक्रीट को इकठा करने, सीमेंट और बजरी को आपस में मिलाने के काम भी लेते है। 

  3. खसिया- खेत की खरप्तवार को निकलने के काम में लिया जाता है।इसे हम खड़े होकर काम में लेते है।   
  4. खुरपा - यह भी खेत की खरपतवार को निकालने  के काम में आता है।  इसको बैठ कर काम में लेते है। 

  5. दन्ताली  -   मुख्य रूप से ये पशुओ  के गोबर को इकठ्ठा करने के काम में आता है।

  6. दांतली -  हरे घास को काटने की काम में आती है
  7. गैती - बहुत कठोर या कांक्रीट वाली जमीन  को खोदने के काम आती है 

  8. निनाण - खेत की खरपतवार को हटाने को निनाण  कहते है 
  9. सूड़ - खेत की बुवाई से पहले खेत से कचरा साफ करने को सूड़  काटना कहते है 
  10. लावणी - फसल की कटाई को लावणी कहते है। 
  11. कड़बी - बाजरे की फैसल जब पक जाती है तो उसको कड़बी कहते है 
  12. सीठा - बाजरे की फसल के फल को सीठा  कहते है 
  13. खळो - कटी हुयी फसल से अन्नाज को निकालना 
  14. हल/सीर - खेत को जोतने वाला उपकरण, जिसको पशुओ की मदद से खेत को जोता  जाता है। 
  15. बुवाई - खेत में फसल को रोपना बुवाई करना कहलाता है 
  16. पलाउ -  खेत की बुवाई से पहले खेत की जमीं को मुलायम करना या पॉली  करने का उपकरण 
  17. साबळ/हिंसु- यह लोहे की एक रोड होती है जो ईंट और पथर  से बनी  दिवार को तोड़ने के काम आती है 
  18. रहड़/ ओठ -पुराने समय में कुए से पानी निकालकर खेत को सींचने वाला चक्करनुमा उपकरण, जो कुए  की मेड़  पर लगता है 
  19. भुण - पुराने समय में कुए से पानी निकालने के चक्करनुमा उपकरण जिस पर से लाव  के सिरे से चड़स को कुए में डाला जाता था तथा दूसरे सिरे को बहार खींचा जाता था। 
  20. जुआ - पशुओ से खेत की बुवाई करते  समय उनके गर्दन पर रखा लकड़ी का उपकरण 
  21. ढीकली -पुराने समय में खड्डे  से पानी निकलकर खेत में डालने वाला जुगाड़ 
  22. लाव - चड़स को खींचने वाली रस्सी 
  23. बटोड़ा/पिरावण्डा- गोबर की थेपड़ी  से बना हुआ पिरामिंड 
  24. बाड़ - पशुओ से फसल की सुरक्षा  के लिए खेत की चारो तरफ बानी हुयी मिट्टी  की दिवार 
  25. खाई-  खेत के चारो तरफ खोदा गया खड्डा 
  26. खद्दान - सड़क के चारो तरफ का खड्डा 
  27. अड्वो/औझाको/ाओघो- खेत में पशुओ से फसल को बचने की लिए लकड़ी का बन हुआ आदमी जैसा पुतला 
  28. हेरौ - खेत की जमींन को पॉली   करने वाला उपकरण 

पशुओ से सबन्धित रोजाना दैनिक जीवन में काम में आने वाले शब्द 

  1. थेपड़ी - गोबर को हाथो से थाप  कर रोटी जैसी बानी हुयी आकृति 
  2. छा ण ा - गोबर के छोटे छोटे टुकड़ो में बाटना 
  3. कुरड़ी - गोबर एक जगह डालने पर बना हुआ टिल्ला 
  4. खुटो - वह लकड़ी जिसे जमीन  में रोप  कर  पशुओ को बाँदा जाता है 
  5. दा वणो - पशुओ  को कण्ट्रोल करने के लिए उनके  पैरो को रस्सी से बांधने वाली रस्सी 
  6. खेळ - आवारा पशुओ के पानी पिने की जगह 
  7. ठांण - शुओं को चारा डालने का उपकरण जो लकड़ी या पत्थर से बनाया जाता है। यह आकार में अक्सर चौकोर होती है।
  8. जिनावर - पशु, मूर्ख व्यक्ति।
  9. मोहरी/मुर्री - पशुओ के मुँह पर बंधी हुयी रस्सी 
  10. छींकि - पशुओ के मुँह को ढकने की लिए तार  से बना हुआ जाली नुमा आकृति 
  11. कोठी - अन्नाज रखने की जगह 
  12. बखारी - सीढ़ियों के उप्पर खली जगह पर बनी अलमीरा 
  13. भरोटी - हरे घास या छड़ियो का गठर जो  रस्सी से बंदा हुआ हो 
  14. खेळ - पशुओ के पानी पिने की जगह 
  15. चड़स - पुराने समय में कुए से पानी निकालने वाला बर्तन 
  16. रखत/हडाओ - पशुओ को चराने के लिए बिना जोति हुयी जगह 
  17. पिड्डो - बैठने के लिए लकड़ी और रस्सी से बनी हुयी 
  18. खाट - लकड़ी की चारपाई 
  19. मुसळ - मोठे अन्नाज को उक्खल में रख कर कूटने वाला उपकरण 
  20. ऊखल - लकड़ी का मांगदःता  जो मोटे  आनाज को कूटने की काम आता है 
  21. मेख - घोड़े को बांधने के लिए दिवार में लगाई हुयी कील 
  22. मोखी- मकान के दिवार पर बना हुआ रोशन दान  
  23. नाथ - बैल और भैसे  के नाक  पर बंधी हुयी रस्सी 
  24. जेवडो - रस्सी 
  25. खेई - खेजड़ी की छडियो से बना हुआ गठर 
  26. छान -बाती से तैयार घर, इसे झूपड़ी चारो तरफ से बंद नहीं हो।
  27. झोपडी - रकंडों (सूखा कुचा ) और बाती से तैयार घर, इसे झूपड़ी कहा जाता 
  28. गंजी -बनियान को देसी भाषा में गंजी कहते हैं
  29. गुलेल -पक्षियों को मार भगाने के लिए लकड़ी से बनाया जाने वाला यंत्र।
  30. लूँग - खेजड़ी के पतो  को लूंग कहते है 

  31. बीड़ -गाँव के किनारों पर खाली पड़ी जमीन जो प्रायः सरकारी होती है जिसमें आवारा पशु चरते हैं बीड़ कहलाती है।
  32. झेरणो -छाछ/दही को मथने के लिए काम में आने वाली एक बड़ी रई झेरणा कहलाती है जिसे हाथों से नेतरा की सहायता से गोल गोल घुमाया जाता है।
  33. बिलोवणा - झेरने की मदद से दही से छाछ बनने की पक्रिया 
  34. सियाळो –– सर्दी का मौसम
  35. अडावा - वह  खेत जो पशुसो को चरने की लिए बिना बुवाई  को छोड़ दिया हो  

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